Video : टिकरापारा के राम मंदिर का विवाद : बर्फानी दादा के शिष्य ने राम मंदिर पर जताया हक़ ! प्राईवेट ट्रस्ट को बताया फर्जी … विधायक देवव्रत सिंह ने भी मंदिर ट्रस्ट पर उठाये सवाल… कलेक्टर से की है शिकायत…

बर्फानी दादा के शिष्य ने राम मंदिर पर जताया हक़

00 बर्फानी दादा के शिष्य बालयोगी लक्ष्मण दास ने किया दावा

00 विधायक के पिता ने बर्फानी दादा को दान में दी थी जमीन

00 वर्तमान में मंदिर में काबिज प्राईवेट ट्रस्ट को बताया फर्जी

सीजी क्रांति/खैरागढ़. नगर के टिकरापारा स्थित राम मंदिर में स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद विधायक देवव्रत सिंह द्वारा कलेक्टर से प्रशासक नियुक्त करने की मांग के बाद मंदिर में मालिकाना हक को लेकर एक नया विवाद छिड़ गया है. विधायक की शिकायत के बाद कलेक्टर ने प्रशासनिक जांच शुरू करवाई है, इस बीच मंदिर पर पूर्व में काबिज रहे ब्रम्हलीन बर्फानी दादा के उत्तराधिकारी के रूप में अमरकंटक से आये लगभग 10 से अधिक साधु-संतों ने मंदिर पर बर्फानी दादा का हक बताया है.

मामले को लेकर नये विवाद के बीच सामने आये बर्फानी दादा के शिष्य बालयोगी लक्ष्मण दास ने कहा है कि सन 2001 से यहां बर्फानी दादा काबिज रहे हैं, खैरागढ़ विधायक देवव्रत सिंह के पिता  जमीन दान में दी थी. उन्होंने साफ किया कि मंदिर से लगी हुई जमीन दादा जी को दान में मिली है, यह जमीन आश्रम बनाने के लिये मिली थी और उसी के मुताबिक आश्रम का संचालन किया जा रहा है. यहां लगातार बर्फानी दादा के मार्गदर्शन में रामचरितमानस, महायज्ञ और काफी विशाल यज्ञ के साथ दिन में रामलीला और रात में रासलीला का भी आयोजन होता रहा है जहां नगर सहित क्षेत्र के श्रद्धालु आते रहे हैं.

बर्फानी दादा के ब्रम्हलीन होने व कोरोना काल के कारण यहां साधु-संतों का आगमन नहीं हो पाया है और इसी बीच प्राईवेट ट्रस्ट बनाकर कुछ लोग यहां हक जता रहे हैं जो गलत है. बालयोगी ने आगे बताया कि अमरकंटक में उनके गुरू का मुख्य स्थान व मुख्य आश्रम है और वे ही बर्फानी दादा के उत्तराधिकारी हैं. जानकारी मिलने पर की राम मंदिर बर्फानी धाम में विवाद की स्थिति निर्मित है हम यहां आये हैं. पता चला कि कुछ लोग ट्रस्ट बनाकर यहां जुड़े हैं लेकिन हमें बहुत अधिक जानकारी नहीं थी.

प्राईवेट ट्रस्टियों ने मंदिर में घूसने नहीं दिया

विवाद के बीच राम मंदिर पहुंचे बर्फानी दादा के शिष्य बालयोगी लक्ष्मण दास ने बताया कि जब साधु-संतों के साथ वे बर्फानी धाम पहुंचे तो प्राईवेट ट्रस्टियों ने उन्हें मंदिर में घूसने नहीं दिया और चार घंटे तक बाहर खड़े रखा और उल्टे साधु-संतों से सवाल-जवाब करने लगे कि वे कौन हैं और क्यों आये हैं. ट्रस्टियों ने कहा कि यह राम मंदिर ट्रस्ट की प्रापर्टी है और उसे हम चला रहे हैं और यह आश्रम हमारा है लेकिन साधु-संतों ने मंदिर के आश्रम में प्रवेश किया और ताला तोडक़र उस कक्ष का दरवाजा खोला जहां बर्फानी दादा रहा करते थे.

बर्फानी दादा के शिष्य बालयोगी लक्ष्मण दास

बालयोगी का दावा बर्फानी दादा के बाद आश्रम हमारा

राम मंदिर व आश्रम को लेकर बालयोगी लक्ष्मण दास ने दावा किया है कि बर्फानी दादा के उत्तराधिकारी होने के कारण आश्रम व राम मंदिर में उनका अधिकार बनता है. उन्होंने बताया कि राजा रविन्द्रबहादुर सिंह द्वारा दान में दी गई जमीन का अधिकार पत्र उनके पास है, उन्होंने 1 एकड़ 28 डिस्मील भूमि खसरा नंबर 167 में श्रीरामचंद्र मंदिर के नाम से दान किया गया था जिसका पक्का रिकार्ड मौजूद है और सर्वराकार के रूप में बर्फानी दादा का नाम अभिलेख में दर्ज है.

विवाद को लेकर रिकार्ड निकलवाया जा रहा है, यहां जो ट्रस्ट समिति बनी है उसकी हमें कोई जानकारी नहीं है, ट्रस्ट का नाम भी हमें नहीं मालूम और न ही नवीन सिंह अथवा किसी अन्य को हमारे आश्रम के द्वारा किसी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं दी गई थी. उसके पास कोई काम नहीं था तो मंदिर में आकर सेवा दे रहा था.

उनसे जब मंदिर के आय-व्यय की जानकारी मांगी गई तो साफ कह दिया आप कौन होते हैं मंदिर का हिसाब मांगने वाले. बहरहाल साधु-संतों के दावे के बाद एक नये विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है, अब आगे देखना होगा कि प्रशासन पूरे मामले में किस तरह निष्पक्ष जांच करेगा और इसका क्या निष्कर्ष निकलता है. बहरहाल विधायक देवव्रत सिंह ने प्राचीन राम मंदिर में प्रशासक नियुक्त करने की मांग की है और पूरे मामले की जांच करवाने का भी आग्रह प्रशासन से किया है.

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