शवों के घर पहुंचते ही गूंजने लगी बेटियों की चीत्कार…अंतिम क्षणों में भी माता—पिता और बहनों से लिपटना तो दूर, शक्ल भी नहीं देख पाए!

जैन मुक्तिधाम में जलती चिताएं
जैन मुक्तिधाम में जलती चिताएं

सीजी क्रांति/खैरागढ़। सड़क हादसे में जान गवाने वाले कोचर परिवार के लोगों के उपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वक्त ने कोचर परिवार की बेटियों को गहरा जख्म दिया है। जिनकों भरने में शायद सदियां भी कम पड़ जाए, बावजूद इसके जख्म भरेगा भी या नहीं शब्दों में बयान कर पाना मुश्किल है।

क्योंकि, जिन्होंने जन्म दिया, उंगली पकड़ चलना सिखाया, दुनियादारी सिखायी और शादी कराकर एक अच्छा गृहस्थ जीवन जीने जिन्होंने ससुराल भेजा ओ आज इस दुनिया में ही नहीं है, गमों को सिलसिला बस यहीं तक नहीं रूकता है। बल्कि जिन तीन छोटी बहनों को खिलाया, उंगली पकड़कर साथ चले, अपनी जिंदगी का हर राज और दुख—तकलीफों को साझा किया…ओ बहनें भी आज दुनिया से रूख्सत हो गई है। कलेजा तो तब फट जाता है, जब चारों बेटिंयां और परिजन अंतिम क्षणों में माता—पिता और बहनों से लिपटना तो दूर…शवों का शक्ल देखना भी नसीब नहीं हो पाया।

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ये तस्वीरें उन्हीं गमों को बयान कर रही हैं…!

शवों को एम्बुलेंस से नहीं उतारा गया

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