बाजार अतारिया में कॉलेज के लिए तरस रहे युवा, कांग्रेस ने की है घोषणा, आस लगाए बैठे हैं छात्र

सीजी क्रांति/खैरागढ़। खैरागढ़—छुईखदान—गंडई जिला निर्माण, जालबांधा को उप तहसील व साल्हेवारा में तहसील बनाए जाने की मांग को कांग्रेस ने पूरा कर दिया। लेकिन दशकों से बाजार अतारिया में कॉलेज निर्माण की मांग अब तक पूरी नहीं हो पाई। 12 वीं के नतीजे आ गए। अब इन बच्चों के पास वहीं सालों पुरानी समस्या फिर से खड़ी हो गई। आगे की पढ़ाई के लिए बाजार अतारिया व आसपास के दो दर्जन से अधिक गांव के सैकड़ों बच्चों को खैरागढ़ या धमधा जाने की मजबूरी हो गई है।

बता दें कि खैरागढ़ विधानसभा उप चुनाव के ठीक पहले बाजार अतारिया में कॉलेज खोलने की मांग ने जोर पकड़ा। स्थानीय युवाओं ने मुखर होकर चुनाव बहिष्कार की धमकी भी दी। इसके बाद राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि हरकत में आए। स्थानीय युवाओं को भरोसा दिलाया कि कॉलेज खोला जाएगा। कांग्रेस ने चुनाव घोषणा पत्र में कॉलेज खोलने का वादा किया। किंतु उस वादे पर अब तक अमल नहीं हो पाया है।

आंदोलन की आग फिर सुलग रही

बाजार अतारिया में कॉलेज के लिए किए गए आंदोलन की आग फिर से सुलगने लगी है। कॉलेज खोलने की प्रशासनिक चहलकदमी नजर नहीं आने और कांग्रेस नेताओं की खामोशी ने स्थानीय युवाओं को आंदोलित होने प्रेरित कर रहा है। मौजूदा हालात को देखते हुए इस वर्ष कॉलेज खोले जाने की संभावना तो नजर नहीं आ रही है!अगले साल 2023 में ​विधानसभा के आम चुनाव होने है। इस बीच कॉलेज खोले जाने की मांग मजबूती से उठाया गया तो संभव है कि अगले शैक्षणिक सत्र से बजार अतारिया में बुनियादी सुविधाओं के साथ ही सही पर कॉलेज खोलने शासन—प्रशासन विवश हो सकता है। हालांकि तब तक खैरागढ़—छुईखदान—गंडई जिला अस्तित्व में आ जाएगा। ऐसे में अगले सत्र से कॉलेल का संचालन शुरू हो सकता है।

जनप्रतिनिधियों ने मजबूती से नहीं उठाया कॉलेज का मुद्दा

हैरत की बात यह है कि बाजार अतारिया में कॉलेज खोलने की मांग अब तक स्थानीय जनप्रतिनिधयों ने मजबूती से नहीं उठाया। न कोई बड़ा धरना हुआ न प्रदर्शन। ऐसे में कॉलेज की मांग को स्थानीय युवाओं ने मुखरता से उठाया। ये उन्ही के प्रयासों का नतीजा रहा है कि कांग्रेस को अपने घोषण पत्र में यहां कॉलेज खोलने की घोषणा करनी पड़ी। युवाओं को उम्मीद थी कि चुनाव होने के बाद कॉलेज खोले जाने के प्रयास तेज हो जाएंगे लेकिन जनप्रतिनिधियों की खोमोशी और प्रशासन की उदासीनता कॉलेज की मांग पर अब तक कोई ठोस बयान अब तक सामने नहीं आया है।

15 साल भाजपा मुंह ताकते रहे, अब कांग्रेस की यशोदा पर टिकी निगाहें

यशोदा वर्मा अभी विधायक बनी है। उनके पास डेढ़ साल का कार्यकाल है। उनके कार्यकाल में कॉलेज खुलने की आस बंधी हुई है। 15 साल प्रदेश में भाजपा की सत्ता रही लेकिन यहां कॉलेज खोलने के ठोस प्रयास नहीं हुए। साढ़े तीन साल कांग्रेस की सरकार को हो गए हैं। हालांकि कम से कम कांग्रेस ने यहां कॉलेज खोलने की घोषणा कर दी है। अब अगले डेढ़ साल में बाजार अतारिया में कॉलेज खुल जाता है तो इससे स्थायीय छात्रों, उनके पालकों शैक्षणिक व आर्थिक राहत मिलेगा वहीं कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

चुनाव बहिष्कार के बाद मनाने पहुंचे थे नवाज खान, दिलाया था कॉलेज खुलने का भरोसा

बाजार अतारिया में कॉलेज नहीं खुलने के विरोध में खैरागढ़ विधानसभा उप चुनाव से पहले युवाओं ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा कर दी थी। युवाओं को मनाने जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष नवाज खान बाजार अतारिया पहुंचे थे। उनकी समस्याएं सुनी। भरोसा दिलाया कि उनकी मांग को वे सरकार तक जरूर पहुंचाएंगे। सरकार ने अपने घोषणा पत्र में कॉलेज की मांग को शामिल भी किया लेकिन कॉलेज खोलने की पहल अब तक नहीं पाई।

इससे युवा निराश है। पालक बच्चों को पढ़ाने में होने वाले आर्थिक बोझ से परेशान है। सरकार के मन में डेढ़ साल की मियाद बाकी है। विपक्ष कॉलेज खोलने में होने वाली देरी को मुद्दा बनाकर सरकर की किरकिरी करने की रणनीति पर प्लान बना रही है। छात्र—छात्राओं को आगे कॉलेज की पढ़ाई करने में होने वाली चिंता सता रही है।

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