बख्शी स्कूल से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं…आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल का स्वागत, मगर बख्शी स्कूल गौरवमयी इतिहास को आंच न आए, पूर्व छात्रों ने खोला मोर्चा

बैठक के दौरान मौजूद भूतपूर्व छात्र

सीजी क्रांति/खैरागढ़। रियासत काल में सन् 1885 से संचालित डॉ.पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी आदर्श उच्चतर माध्यमिक शाला (विक्टोरिया स्कूल) में आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल के संचालन की खबर को लेकर भूतपूर्व छात्रों की नगर में बैठक हुई। अंबेडकर चौक में जुटे बख्शी (विक्टोरिया) स्कूल के पूर्व छात्रों ने कहा है कि स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल छग शासन की एक महत्वाकांक्षी योजना है और इस योजना का हम सभी स्वागत करते हैं। लेकिन इस बात का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिये कि नई बस्ती बसाने के लिये पुरानी बस्ती को न उजाड़ा जाये।

किन्तु कतिपय प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण ऐसा हो रहा है कि बख्शी स्कूल की ऐतिहासिकता और गौरवमयी इतिहास से छेड़छाड़ की जा रही है। दरअसल बख्शी स्कूल में जिला शिक्षा अधिकारी की अगुवाई में अस्थाई रूप से आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल संचालित करने का निर्णय लिया गया है और इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जबकि अस्थाई रूप से आत्मानंद स्कूल के संचालन का कोई प्रावधान नहीं है।

बैठक में जुटे बख्शी स्कूल के पूर्व छात्र रहे बृजेश श्रीवास्तव, जफर उल्लाह खान, राजू यदु, कौशलेन्द्र सिंह, नरेन्द्र सोनी, प्राणेश वैष्णव, सूरज देवांगन, नवदीप श्रीवास्तव, आलोक श्रीवास, मंजित सिंह, अभिषेक सिंह, राजकुमार बोरकर, रमेश यदु, नितिन कुमार, महेश बंजारे सहित विशेष रूप से सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह की उपस्थिति में आपत्ति की गई कि डॉ.पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी जो भारतीय साहित्य की ख्यातिलब्ध शख्सियत रहे हैं और अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पं.रविशंकर शुक्ल दोनों ने बख्शी स्कूल में अध्यापन का कार्य किया है। वहीं खैरागढ़ राजपरिवार की अदम्य दानशीलता के कारण 1885 में 137 साल पहले स्कूल अस्तित्व में आया और छत्तीसगढ़ में जस गीतों के पुरोधा रहे राजा कमलनारायण सिंह इस विद्यालय के प्रथम छात्र थे।

विक्टोरिया स्कूल के नाम से प्रचलित इस स्कूल की ख्याति समूचे मध्य भारत में रही है और दूर दराज से छात्र-छात्राएं यहां अध्ययन करने पहुंचते रहे हैं और यहीं से अध्ययन उपरांत देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी यहां के छात्र अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लगभग एक दशक पहले ही डॉ.पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के नाम से विद्यालय का नाम विक्टोरिया से बदलकर उनके नाम पर किया गया है और अनवरत यहां हिन्दी माध्यम के अमीर ही नहीं गरीब तबके के भी छात्र अध्ययन कर रहे हैं। इसलिये इस ऐतिहासिक स्कूल के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिये और आत्मानंद स्कूल के संचालन को लेकर प्रशासन को ब्लू प्रिंट सार्वजनिक किया जाना चाहिये।

बैठक में भूतपूर्व छात्रों ने कहा कि किसी भी हाल में बख्शी स्कूल के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिये। आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल के संचालन के लिये पूर्व में सिविल लाईन स्थित कन्या शाला का चयन किया गया था। जिसके लिये पूर्व विधायक स्व.देवव्रत सिंह की रजामंदी से स्कूल का निरीक्षण राजनांदगांव जिलाधीश तारण प्रकाश सिन्हा ने भी किया था। लेकिन ऐसी क्या स्थिति निर्मित हुई है कि कन्या शाला को छोडक़र बख्शी स्कूल में आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल का संचालन करना प्रशासन को उचित लग रहा है जबकि बख्शी स्कूल में लगभग 2 हजार छात्र अध्ययन करते हैं वहीं कन्या शाला में एक हजार छात्र अध्ययनरत हैं।

उचित होगा कि प्रशासन अस्थाई रूप से पारित किये गये प्रस्ताव पर चिंतन कर बख्शी स्कूल में अंग्रेजी माध्यम स्कूल का संचालन न करे। बैठक में भूतपूर्व छात्रों ने तय किया है कि बख्शी स्कूल की ऐतिहासिकता व हिन्दी माध्यम स्कूल को बचाने हस्ताक्षर अभियान चलाया जायेगा वहीं सोशल मीडिया के माध्यम से भी अभियान जारी रखा जायेगा वहीं मुख्यमंत्री सहित शिक्षा मंत्री, जिलाधीश व खैरागढ़ में पदस्थ ओएसडी महोदय के समक्ष भी वे अपनी बात रखेंगे। अगर प्रशासन फिर भी अपनी जिद पर अड़ा रहा तो भूतपूर्व छात्र मामले को लेकर हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

Leave a Comment

ताजा खबर