कैबिनेट बैठक : अनियमित कर्मचारियों को मिलेगी सौगात या फिर हाथ लगेगी निराशा !

अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण

सीजी क्रांति/रायपुर।  गुरुवार को राज्य सरकार प्रदेश के अनियमित कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला ले सकती है। अनियमित कर्मचारियों की नजरें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में 6 जुलाई को होने वाली कैबिनेट की बैठक पर टिकी हुई हैं। वर्षों से नियमितीकरण की मांग कर रहे संविदा, दैनिक वेतन भोगी, कलेक्टर दर, मानदेय, प्लेसमेंट, अशंकालिक, जाबदर, ठेका व अन्य अनियमित कर्मचारी विधानसभा चुनाव से पहले इस कैबिनेट की बैठक में अपने नियमितीकरण को लेकर काफी उम्मीदें लगाए बैठे है। नियमितिकरण के मामले में डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा कि, फिलहाल सभी विभागों की जानकारी मंगाई है। सभी से चर्चा के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचेंगे।

बताया जा रहा है कि भूपेश सरकार नियमितीकरण का वादा पूरा करने की दिशा में 2019 से ही प्रयास कर रही है, लेकिन विभागों से पूरी जानकारी नहीं मिलने के कारण मामला अटका हुआ है। अब सरकार जल्द ही अपना यह वादा पूरा करने जा रही है. चर्चा है कि 6 जुलाई को प्रस्तावित कैबिनेट की बैठक भूपेश सरकार इस पर बड़ा फैसला ले सकती है।

बता दें कि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में सरकार बनने पर अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण का वादा किया है। इस दौरान घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने अनियमित कर्मचारियों की मांग को घोषणा पत्र में शामिल करते हुए उन्हें नियमित करने का भरोसा दिलाया था लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के  बाद भी नियमितीकरण का वादा अब तक अधूरा है।

CM भूपेश बघेल ने दिलाया था भरोसा…

17 दिसम्बर 2018 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद भूपेश बघेल ने कुछ घंटे के बाद ही किसानों की कर्ज माफी की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद अनियमित कर्मचारियों में भी अपनी मांग पूरी होने की आस जगी थी।14 फरवरी 2019 को कर्मचारी संघ के रायपुर के गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने भूपेश बघेल ने साल 2020 में अनियमित कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने का एक बार फिर भरोसा दिलाया था जो आज तक पूरा नहीं हुआ है।

बड़े आंदोलन की तैयारी, सभी संगठन हो रहे एकजुट

वर्षो से अपने नियमितीकरण की मांग कर रहे संविदा, दैनिक वेतन भोगी, कलेक्टर दर, मानदेय, प्लेसमेंट, अशंकालिक, जाबदर, ठेका व अन्य अनियमित कर्मचारी संगठन एक बार फिर सड़क पर उतरने तैयारी कर रहे हैं। विभिन्न संगठन आंदोलन की रूपरेखा को अंतिम रूप में देने जुटे हुये है। प्रदेशभर के संविदा कर्मचारी तीन जुलाई से निश्चितकालीन आंदोलन की शुरुआत कर दी है. छत्तीसगढ़ सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले होने वाले इस आंदोलन में राज्यभर के 45 हजार संविदा कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना है। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष कौशलेंद्र तिवारी व प्रवक्ता सूरज सिंह ठाकुर ने बताया कि तीन से नौ जुलाई तक सभी विभागों के संविदा कर्मचारी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन करेंगे, वहीं 10 जुलाई से राजधानी में राज्य स्तरीय आंदोलन होगा।

मध्यप्रदेश में संविदा कर्मचारियों पर सौगातों की बरसात

मध्यप्रदेश के करीब डेढ़ लाख संविदा कर्मचारियों को सालाना कॉन्ट्रैक्ट कल्चर से मुक्ति मिल गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा- मैं यह फैसला कर रहा हूं कि संविदा कर्मचारियों की प्रतिवर्ष अनुबंध की प्रक्रिया समाप्त की जाती है। उन्होंने यह ऐलान भोपाल के मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में संविदा कर्मचारियों के प्रांतीय सम्मेलन में किया।

CM शिवराज ने ये घोषणाएं भी कीं

  • संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन मिलेगा।
  • नेशनल पेंशन स्कीम का लाभ सभी को दिया जाएगा।
  • स्वास्थ्य बीमा का लाभ भी मिलेगा।
  • अनुकंपा नियुक्ति भी दी जाएगी।
  • रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटि की व्यवस्था भी की जाएगी।
  • नियमित पदों पर भर्ती में 50% रिजर्वेशन संविदा कर्मचारियों के लिए किया जाएगा।
  • नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश की पूरी सुविधा मिलेगी।
  • नियमित कर्मचारियों की तरह महिला संविदा कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश दिया जाएगा।

छुट्टियां सीएल, ईएल, ऐच्छिक अवकाश भी नियमित कर्मचारियों की तरह की जाएगी।

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