खैरागढ़ विधानसभा से लिमेश्वरी साहू की भी तैयारी, संघ से नजदीकी और साहू समाज का बड़ा वोट बैंक है साथ

लिमेश्वरी साहू


सीजी क्रांति/खैरागढ़। खैरागढ़ विधानसभा से यशोदा वर्मा की जीत के बाद अब भाजपा से भी महिला उम्मीदवारी की संभावना टटोली जा रही है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य लिमेश्वरी साहू ने पार्टी कार्यक्रमों व क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। संघ से नजदीकी और साहू समाज का बड़ा वोट बैंक होने के कारण लिमेश्वरी साहू की उम्मीदवारी को कमतर नहीं आंका जा सकता।

भाजपा में साहू समाज से महिला नेत्री के रूप में लिमेश्वरी साहू एकमात्र बडा चेहरा है। साहू समाज के साथ-साथ लिमेश्वरी साहू की पकड़ ओबीसी समाज में भी मजबूत है। भाजपा में साहू समाज लिमेश्वरी साहू सक्रिय चेहरा है। लिमेश्वरी साहू की पार्टी में अपनी स्वतंत्र पहचान है। जबकि उनके पति हेमू साहू भी भाजपा की राजनीति में सक्रिय है। पार्टी के ग्रास रूट में उनकी पकड़ तगड़ी है।

लिमेश्वरी साहू के पास केवल चुनावी राजनीति का अनुभव होने के साथ-साथ पार्टी संगठन में भी काम करने का जबर्दस्त अनुभव है। वे महिला मोर्चा के विभिन्न दायित्यों का सफल निर्वाह कर चुकी है। इसे साथ ही श्रीमती साहू साहू अविभाजित राजनांदगांव साहू समाज में महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष भी रह चुकी है। वहीं कबीर पंथी साहू समाज की भी पदाधिकारी हैं। विधानसभा में साहू समाज के साथ-साथ कबीरपंथ को मानने वालों की भी बड़ी संख्या है। उम्र के लिहाज से भी लिमेश्वरी साहू पार्टी की युवा चेहरा हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच लिमेश्वरी जाना-पहचाना नाम है। यानी क्षेत्र में लिमेश्वरी साहू के सामने पहचान का संकट नहीं है। सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक दृष्टि से भी लिमेश्वरी साहू संपन्न शख्सियत है।

जिला निर्माण आंदोलन में हेमू साहू की बड़ी भूमिका, साहू समाज में भी मजबूत पकड़
बता दें कि जिला निर्माण आंदोलन में लिमेश्वरी साहू व उनके पति हेमू साहू की बड़ी भूमिका रही है। जिला निर्माण के लिए चले सबसे लंबे भूख हड़ताल में हेमू साहू सर्वाधिक सक्रिय रहे हैं। उन्होंने गांव-गांव तक पहुंचक लोगों को जिला निर्माण से होने वाले फायदे और अन्य सुविधाओं को लेकर जागरूकता अभियान का बड़ा चेहरा रहे हैं। वहीं साहू समाज व अन्य पिछड़ा वर्ग में हेमू साहू की भी अच्छी पकड़ है। इसका सीधा फायदा लिमेश्वरी साहू को भी मिल रहा है।

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