करमतरा में 24 घंटे के गुस्से का शोर खत्म! अब गांव में मातम, नहीं जाती 6 साल के मासूम की जान, अगर…..

सीजी क्रांति न्यूज/खैरागढ़। मंगलवार की शाम पूरे करमतरा गांव के लिए न मिटने वाली मनहूस याद बनकर रह गई। बीच रोड पर 6 साल के मासूम को घसीटे जाने के निशान और खून के धब्बे देखकर पूरे गांव में लोगों के दिल पसीज गए हैं। ग्रामीणों की जागरूकता और पुलिस की तत्परता से आरोपी पकड़ा गया है। मृत बच्चे का बुधवार को अंतिम संस्कार हो गया। बीते 24 घंटे से चल रहे गुस्से का शोर खत्म हो गया। अब गांव में मातम है। दर्द, कराहना और सिसकने की आवाज मृतक के घर ही नहीं बल्कि गांव के अधिकांश चौखट पर खड़े होकर सुनी जा सकती है।

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बहरहाल खैरागढ़-दुर्ग मुख्य मार्ग में हुए इस हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे के पीछे वजहों को ढूंढे तो दो मुख्य कारण समझ में आता है। पहला ट्रैफिक रूल्स को तोड़ना और दूसरा रोड इंजीनियरिंग और तीसरा यदि जोड़े तो गैरजिम्मेदारी भी एक वजह मानी जा सकती है।

पहली वजह पर बाते करे तो ट्रैफिक रूल्स को तोड़ते हुए आरोपी वाहन को तेज गति से चला रहा था। यानी स्पीड लिमिड को क्रांस करना यानी मौत को आमंत्रित करना है। यदि वाहन चालक जैसे ही गांव के भीतर या समीप पहुंचा। वहां वाहन की गति को कम कर तेज हार्न मार देता तो शायद यह हादसा न होता। आटोमोबाईल इंजीनियिरिंग की नजर से देखे तो संभावित हादसों को रोकने के लिए व सामने वाले को सतर्क करने के लिए हॉर्न और ब्रेक की अहम भूमिका होती है।

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दूसरी वजह पर गौर करें तो गांव में जिस जगह पर हादसा हुआ हैं वहां ब्रेकर नहीं है। कुछ साल पहले नियमों में तब्दीली आई और स्टेट व नेशनल हाईवे में ब्रेक बनाने के प्रावधान को ही खत्म कर दिया गया। यदि यहां ब्रेकर होता तो स्वाभाविक रूप से वाहन की गति खुद ही धीमी हो जाती।

इसके बावजूद भी बच्चा गाड़ी की चपेट में आ ही जाता तब भी उसके बचने के या वाहन चालक को संभलने का मौका मिल जाता। पर ऐसा नहीं हो सका क्योंकि ब्रेकर न बनाने के प्रावधान की आड़ लेकर ब्रेकर नहीं बनाया गया। हालांकि ऐसे भी उदाहरण है जहां हादसों के लिहाज से संवेदनशील जगहों पर ब्रेकर बनाया गया है। लेकिन खासकर गांव में चौक-चौराहों में ब्रेकर की आवश्यकता है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैफिक सेंस या नॉलेज कम होता है।

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तीसरी बात यह है कि जहां हादसा हुआ है। वह भगवान गणेश की प्रतिमा रखी गई थी, जहां लोगों का आना-जाना लगा हुआ था। इस बीच मासूम बच्चा गणेश पंडाल से अपने घर की ओर जाने रोड क्रास कर रहा था। इसी बीच लापरवाही पूर्वक वाहन चलाते हुए इनोवा कार ने बच्चे को अपनी चपेट में ले लिया। आसपास के लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही वह मासूम बच्चा गाड़ी में फंसकर लहूलुहान होकर अधमरा स्थिति में पहुंच चुका था। मुख्य मार्ग में बड़े वाहनों की आवाजाही और संभावित हादसों की ध्यान में रखते हुए बच्चों के मुख्य सड़क के आसपास खेलने या गुजरने को लेकिन बड़े लोग सर्तक होते तब भी ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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अब यहां पुलिस ने खैरागढ़ क्षेत्र में ब्लेक स्पॉट क्षेत्र घोषित किए हैं लेकिन इसके बावजूद भी वहां रोड इंजीनियरिंग समेत अन्य जरूरी इंतजाम नहीं किए गए हैं। कही न कहीं रोड हादसों में नकेल कसने के जो ठोस प्रयास होने चाहिए, उस प्रयास में प्रशासन की नाकामी आए दिन हो रहे हादसों से उजागर हो जा रहा है।

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