विधानसभा उप चुनाव में जीत से कोमल जंघेल की शुरूआत और हार से अंत! राज परिवार की राजनीति को 15 साल छकाया, अब विक्रांत युग की शुरूआत

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सीजी क्रांति न्यूज/खैरागढ़। साल 2007 में देवव्रत सिंह के सांसद बनने के बाद खाली हुई खैरागढ़ विधानसभा उप चुनाव में भाजपा के कोमल जंघेल ने विधानसभा की राजनीति की शुरूआत की। और फिर देवव्रत सिंह की मौत के बाद हुए उप विधानसभा चुनाव में हार के बाद कोमल जंघेल की राजनीतिक पारी फिलहाल समाप्त हो गई। 2023 में होने वाले विधानसभा के आम चुनाव में भाजपा ने विक्रांत सिंह को टिकट दिया है।

इस बीच पूरे 15 साल कोमल जंघेल ही भाजपा के प्रत्याशी रहे। उन्हें 5 बार टिकट दिया गया। जो अपने आप में एक रिकार्ड है। इस बीच राजपरिवार की राजनीति हाशिए पर और लोधीवाद हावी रही। हालांकि 2018 में जोगी कांग्रेस से चुनाव लड़कर देवव्रत सिंह ने अपनी लोकप्रियता साबित करते हुए दमदार वापसी की।

कोमल जंघेल वही नेता हैं, जिन्होंने खैरागढ़ में 47 साल बाद राजपरिवार के मिथक को तोड़ा था। साल 2007 में उन्होंने पहली बार राजा देवव्रत सिंह की पत्नी रही पद्मा सिंह को शिकस्त देकर खैरागढ़ में कमल खिलाया।
दरअसल, साल 1960 से 1993 के बीच हुए खैरागढ़ विधानसभा के चुनाव में हमेशा से रानी रश्मि देवी सिंह जीतती रहीं। उनके निधन से 1995 में सीट खाली हुई तो उपचुनाव में उनके ही बेटे देवव्रत सिंह ने जीत दर्ज की।

इसके बाद 1998 और 2003 के चुनाव में भी देवव्रत सिंह ने बाजी मारी। फिर राजनांदगांव से भाजपा सांसद प्रदीप गांधी रिश्वत कांड में फंसे और उनकी सांसदी चली गई। लोक सभा उप चुनाव में देवव्रत सिंह ने संसदीय चुनाव लड़ा और एक बार फिर खैरागढ़ विधानसभा की सीट खाली हो गई।

साल 2007 में उपचुनाव की घोषणा हुई। इस बार कांग्रेस ने देवव्रत सिंह की पत्नी पद्मा सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। वहीं भाजपा ने पहली बार कोमल जंघेल पर भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट दिया। नारा दिया गया ‘महल से हल टकराएगा और कोमल विधानसभा जाएगा…’। यह नारा उस दौर में खूब चला था। मतदान के बाद परिणाम आए तो उपचुनाव में जीत का सेहरा कोमल के सिर बंध चुका था।

इसके बाद 2008 के चुनाव में फिर से भाजपा ने कोमल जंघेल पर भरोसा जताया। तब उनके सामने कांग्रेस ने मोती लाल जंघेल सामने आए। उस चुनाव में कोमल जंघेल को 62 हजार 437 और मोतीलाल जंघेल को 42 हजार 893 वोट मिले थे। इस तरह 19 हजार 544 वोटों से एक बार फिर कोमल जंघेल ने आम चुनाव में अपनी जीत दर्ज की। हालांकि 2013 के चुनाव में कांग्रेस के गिरवर जंघेल ने उन्हें 2190 वोट से शिकस्त दी।

2018 के आमचुनाव में कोमल को लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा तब जोगी कांग्रेस से देवव्रत सिंह चुनाव मैदान में थे। यह हार भी काफी करारी थी। महज 870 वोटों से कोमल जंघेल पराजित हुए थे। देवव्रत को 61516 और कोमल को 60646 वोट मिले थे। जबकि मौजूदा विधायक गिरवर जंघेल 31 हजार 811 वोट पाकर तीसरे स्थान पर थे।

फिर देवव्रत सिंह की मौत के बाद खैरागढ़ विधानसभा सीट खाली हुई। 2022 में भाजपा से कोमल को टिकट मिला और कांग्रेस ने यशोदा नीलांबर वर्मा को मैदान में उतारा। इस चुनाव में कांग्रेस का परचम लहराया। कोमल इस चुनाव में करीब 20 हजार 159 वोटों से पराजित हुए। हालांकि उनका वोट शेयर बढ़ और सरकार के खिलाफ उन्होंने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई।

कोमल को 67 हजार 481 वोट पड़ें वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मंत्रिमंडल समेत पूरे कांग्रेस के ताकत लगाने के बाद कांग्रेस की यशोदा वर्मा ने 87 हजार 640 मत हासिल कर कांग्रेस को जीत दिलाया। इस चुनाव में भाजपा को 20 हजार 159 वोटों से शिकस्त खानी पड़ी।

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