‘भगा गे-भगा गे, विधायक भगा गे’ भाजपा के इस नारे से लोधी समाज में नाराजगी, विधायक यशोदा भी आहत, क्यों… पढ़ें पूरी खबर

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सीजी क्रांति न्यूज/खैरागढ़। हाल ही में विधायक निवास घेराव के दौरान ‘भगा गे-भगा गे, विधायक भगा गे’ इस नारे से लोधी समाज के एक वर्ग में गहरी नाराजगी है। विधायक यशोदा वर्मा ने भी भाजपा के रवैये पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कड़ी भर्त्सना की है। छत्तीसगढ़ के लोक प्रचलित भाषा में भगा गे जैसे शब्दों का उपयोग खासकर महिला के संबंध में घोर आपत्तिजनक और अपमानित करने के आशय से इस्तेमाल किया जाता है।

विधायक यशोदा वर्मा ने कहा, भाजपाईयों को छत्तीसगढ़ी संस्कृति परंपरा और लोक प्रचलित भाषाओं का ज्ञान नहीं है। इसी वजह से उन्होंने एक महिला विधायक के खिलाफ भगा गे जैसे स्तरहीन भाषा का उपयोग किया। यदि उनकी आत्मा में छत्तीसगढ़िया भाव या ज्ञान होता तो वे ‘लुका गे-लुका गे विधायक लुका गे’ शब्द उपयोग करते।

विधायक यशोदा ने बताया कि जिस दिन भाजपा ने उनके निवास का घेराव किया, उस दिन वे विधानसभा सत्र में शामिल होने के लिए रायपुर प्रवास पर थी। पूरे छत्तीसगढ़ के 90 विधायक विधानसभा के मानसून सत्र में रायपुर प्रवास पर थे। ऐसे में जानबुझकर उनकी अनुपस्थिति की जानकारी होने के बावजूद उनके निवास का घेराव किया गया। उनसे 13 सवाल पूछे गए। उन सवालों का जवाब 4 अगस्त को खुले मंच पर देंगी।

विधायक यशोदा वर्मा ने कहा कि विधानसभा का मानसून सत्र खत्म हो गया है। वे अब खैरागढ़ में ही है। भाजपा नेताओं को यदि विकास की इतनी चिंता है तो अब आकर उनसे मिल ले। और उन्हें जो भी सवाल करना है, कर ले। उनका मेरे निवास में स्वागत है।

क्षेत्र के विकास की यदि इतनी ही चिंता होती तो भाजपा बीते साढ़े 4 साल तक घर में बैठकर नहीं रहते। अब चुनाव नजदीक आ रहा है तो सड़कों पर ओछी राजनीति और महिला विधायक के संबंध में गंदे और आपत्तिजनक नारेबाजी कर कर रहे हैं। भाजपा खुद को चाल-चेहरा और चरित्र वाली पार्टी कहती है। उनका चाल-चेहरा और चरित्र उनके आंदोलन के दौरान की गई स्तरहीन टिप्पणी और नारेबाजी को जनता ने देख और सुन लिया।

विधायक बनने से पहले वह एक महिला है। किसी की पत्नी है। बहू है। बेटी है। मां है। लेकिन उनकी गैरअनुपस्थिति में ओछी राजनीति किए जाने की वे कड़े शब्दों में निंदा करती है। श्रीमती वर्मा ने कहा कि मेरे खिलाफ जो नारे लगाए गए, क्या भाजपा नेता अपने पार्टी की महिलाओं के खिलाफ भी लगा सकते हैं। भाजपा 15 साल सत्ता में रहने के बाद बुरी तरह हुई हार को पचा नहीं पा रहे हैं। सत्ता के नशे से वे अब तक नहीं उबरे हैं।

जिला बनना ही अपने आप में ऐतिहासिक और विकास का द्वार है

यशोदा वर्मा ने कहा कि खैरागढ़-छुईखदान-गंडई को जिला बनाना ही अपने आप में ऐतिहासिक और विकास का द्वार खोलने जैसा है। भूपेश सरकार की योजनाओं से आम आदमी ही नहीं बल्कि भाजपा के नेता भी लाभान्वित हो रहे हैं। मैं पूछना चाहती हूं कि क्या भाजपा के नेताओं ने कर्ज माफी का लाभ नहीं लिया। क्या उन्होंने धान नहीं बेचा। धान के बदले में 2500 रूपए नहीं लिए। बिजली बिल हाफ का लाभ नहीं लिए। गोबरी खरीदी योजना का लाभ नहीं लिए। चंदखुरी में बने माता कौशल्या के मंदिर का दर्शन नहीं किया। राम वनपथ गमन पर नहीं चलेंगे। आत्मानंद स्कूल में अपने बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे। सिद्धबाबा जलाशय का पानी नहीं लेंगे। जालबांध को उप तहसील और साल्हेवारा को पूर्ण तहसील बनाए जाने के बाद उसका लाभ भाजपाईयों को नहीं मिलेगा। बाजार अतारिया और जालबांध में कॉलेज में सबका एडमिशन नहीं होगा। बेरोजगारी का भत्ता भाजपा के युवा भाईयों को नहीं मिलेगा। भाजपा के राज में चिटफंड कंपनियों में जनता की मेहतन कमाई डुबी, उसे लौटाने का काम कांग्रेस ने किया। क्या भाजपाईयों को इससे लाभ नहीं मिला।

मैं कांग्रेस का घोषणा पत्र लाती हूं, भाजपा अपना ले आए, जनता के बीच बैठकर मिलान कर लेते हैं किसने कितना अपना वादा निभाया है

विधायक यशोदा वर्मा ने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में अधिकांश पूरी हो गए। कुछ अधूरे भी है लेकिन वह भी पूरा होगा, क्योंकि भूपेश है तो भरोसा है। मैं चुनौती देती हूं कि मैं कांग्रेस का घोषणा पत्र लाती हूं और भाजपा अपना घोषणा पत्र ले आए। जनता के बीच बैठकर मिलान कर लेंगे कि किसने अपने घोषणा पत्र और वायदों को कितना पूरा किया। दुध का दुध और पानी का पानी हो जाएगा।

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