छत्तीसगढ़ में 229 करोड़ का गोबर घोटाला, वर्मी कंपोस्ट खाद खरीदने किसानों को मजबूर कर रही सरकार!


सीजी क्रांति न्यूज/रायपुर। गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी में छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने 229 करोड़ का घोटाला किया है। यह घोटाला चारा घोटाला से भी बड़ा है। राज्य के किसानों को वर्मी कंपोस्ट खरीदने मजबूर किया जा रहा है। यह तमाम आरोप सोमवार को प्रेसवार्ता में भाजपा कार्यालय में विधायक सौरभ सिंह ने लगाया है।

श्री सिंह ने कहा कि गोबर खरीदी में कैसे भ्रष्टाचार हुआ है या प्रदेश सरकार के आंकड़ों से पता चल रहा है। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत प्रदेश सरकार ने 246 करोड़ रुपए की गोबर खरीदी की तो यह गोबर सरकारी संपत्ति हो गया क्योंकि गोधन न्याय योजना में सरकार का पैसा लगा, बजट का पैसा लगा है।


भाजपा संभाग प्रभारी एवं विधायक श्री सिंह ने प्रदेश सरकार से सवाल किया कि जब 246 करोड़ का गोबर प्रदेश सरकार ने खरीदा तो खरीदे गए गोबर का क्या बना कर बेचा और उसकी कितनी कीमत मिली? जिसके जवाब में प्रदेश सरकार के मंत्री जी का जवाब आया कि हमने 86 लाख रुपए का ही सामान बेचा है और इसके बारे में भाजपा ने हिसाब लगाया तो 17 करोड़ रुपए की बिक्री का तथ्य सामने आया। प्रदेश सरकार द्वारा दिया गया जवाब ही गलत है।

श्री सिंह ने कहा कि अगर हिसाब लगाया जाए तो 246 करोड रुपए में से 17 करोड़ रुपए घटा दें तो 229 करोड़ रूपए बचता है, जिसका हिसाब प्रदेश सरकार के पास नहीं है। गोबर खरीदी करने के बाद उसको वर्मी कंपोस्ट खाद बनाकर या पेंट बनाकर बेचा गया तो उसका वैल्यू ऑडिशन किया गया। दो रुपए किलो में गोबर खरीदने के बाद उसको 10 रुपए किलो की दर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर बेचते हैं।

उसके बाद भी टोटल रिलाइजेशन हो रहा है, वह केवल 17 करोड़ रुपए का हो रहा है। तो 229 करोड रुपए कहां गया? वह गोबर है कहां? अगर आपने 229 करोड़ रुपए का सामान नहीं बेचा तो निर्मित सामान कहां-कहां पर है? किस-किस गौठान में हैं? कितना पेंट स्टॉक है? यह प्रदेश सरकार को बताना चाहिए।

भाजपा रायपुर संभाग प्रभारी व विधायक श्री सिंह ने कहा कि इससे साफ-साफ पता चलता है कि प्रदेश सरकार के पास 229 करोड रुपए का कोई हिसाब नहीं है। यह गंभीरता के लिहाज से चारा घोटाले से भी बड़ा घोटाला है।

विधायक सौरभ सिंह ने कहा कि गौठान समिति के माध्यम से गोबर की खरीदी की जाती है। पहले गोठान समिति का अध्यक्ष ग्राम पंचायत से होता था जिसे बाद में प्रभारी मंत्री को अध्यक्ष बनाने का अधिकार दिया गया, जिसमें कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को ही गौठान समिति का अध्यक्ष बनाया गया। जिसमें उनके द्वारा उटपटांग ढंग से गोबर की खरीदी की गई।

श्री सिंह ने बताया कि एक परिवार की तीन महिलाओं ने 282 लाख किलो गोबर बेचा। ऐसे कई उदाहरण हैं। गोबर खरीदी को लेकर जो आंकड़े बताये जा रहे हैं जहां-जहां गोबर खरीदी की जो मात्रा बताई जा रही है, वहां तो गोबर रखने तक की व्यवस्था नहीं है, उतना स्टॉक ही नहीं बना है जितना यह लोग गोबर खरीदी का दावा करते हैं।

श्री सिंह ने दो टूक आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार ने 229 करोड़ रुपए का गोबर घोटाला किया है। गोठान समितियों ने सेवा सहकारी समितियों से कहा कि उपरोक्त गौठान में किस मात्रा में वर्मी कंपोस्ट खाद बना है उसका भुगतान कर दो। भुगतान एडवांस हो गया सेवा सहकारी समिति किसानों की समिति है। गौठान समिति ने जितनी मात्रा में भुगतान किया, उतनी मात्रा में वर्मी कंपोस्ट खाद लाकर जमा नहीं किया। इससे पता चलता है कि या तो गोबर खरीदा नहीं गया या फिर वर्मी कंपोस्ट खाद बना ही नहीं।

प्रदेश के किसानों को जबरदस्ती वर्मी कंपोस्ट खाद खरीदने के लिए विवश किया जा रहा है। जब किसान वर्मी कंपोस्ट खाद खरीदेंगे तब उन्हें रासायनिक खाद देंगे। किसान वर्मी कंपोस्ट खाद नहीं ले रहे हैं तो उनके ऊपर दबाव बनाया जा रहा है कि आपको वर्मी कंपोस्ट खाद खरीदना ही पड़ेगा। फर्टीलाइजेशन एक्ट के तहत सोसाइटियों से जो खाद बेच रहे हैं उसमें आपको बताना होगा कि उन खादों में कौन-सा केमिकल है कितना प्रतिशत इसमें नाईट्रोजन है कितना प्रतिशत इसमें फास्फोरस है और कितना प्रतिशत इसमें पोटेशियम है जिसे सरकार बता नहीं पा रही है।

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