खैरागढ़ पालिकाध्यक्ष शैलेंद्र वर्मा का कमजोर नेतृत्व, भ्रष्टाचार चरम पर, ठेकेदारों की मनमानी, खुद के पार्षद एकजुट नहीं

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सीजी क्रांति न्यूज/खैरागढ़। खैरागढ़ नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र वर्मा के कार्यकाल में सरकारी पैसों का जमकर दुरूपयोग हो रहा है। वहीं भ्रष्टाचार चरम पर है। शहर विकास के लिए भले ही 10 करोड़ रूपए खर्च किए जाने का दावा किया जा रहा हो लेकिन उन पैसों को दुरगामी परिणाम को देखते हुए ठोस कार्य में नहीं लगाया जा रहा है। वहीं भ्रष्टाचार का आलम यह है कि पालिका में ठेकेदारों के रिंग को तोड़कर उनके बीच कांपीटिशन पैदा करने की बजाए जनप्रतिनिधि खुद ही अपने करीबियों के लाईसेंस पर ठेकेदारी कर रहे हैं।

पालिका में अधिकांश निर्माण कार्य व सामग्री सप्लाई में अप्रत्यक्ष रूप से पार्षद ही काम ले रहे हैं! लिहाजा शहर के अधिकांश निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की परवाह नहीं की जा रही है। इन सबके बीच पालिका में विपक्ष में बैठे भाजपा पार्षद जमीनी लड़ाई लड़ने के बजाय विरोध की रस्मअदायगी कर रहे हैं!

स्वच्छता श्रृंगार योजना के तहत पालिका को महज छह शौचालयों के मेंटेनेंस के लिए हर माह एक लाख 80 हजार रूपए प्राप्त हो रहे हैं, लेकिन शौचालयों की स्थिति बदतर है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए बाहरी दीवारों का रंगरौगन किया जा रहा है लेकिन भीतर टायलेट सीट जर्जर स्थिति में है।
उपयोगिता और आवश्यकता को दरकिनार कर नगर में 71 लाख रूपए की सीमेंट की कुर्सियां खरीदी गई है। जिनमें अधिकांश या तो गायब हो गए हैं या सार्वजनिक उपयोग में नहीं आ रहे हैं।

नगर में अवैध प्लाटिंग के रोकथाम के लिए पालिका हाथ पर हाथ धरे बैठी है। अवैध कॉलोनी विद्या नगर के समीप ही एक और अवैध प्लाटिंग हो गई लेकिन पालिका आंख मूंदे बैठी हुई है। न ही अवैध प्लाटिंग करने वाले भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई कर रही है न ही अवैध कॉलोनी के रहवासियों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध करवा पा रह है।

नगर में पराने कांजी हाउस तोड़कर वहां कांपलेक्स तान दिया गया है। उसके बाद से नगर में कांजी हाउस नहीं बनाया गया। शहरों में आवारा मवेशियों के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं लेकिन पालिका प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंग रहा है।

बर्तन बैंक योजना के तहत पालिका में पैसा आया, लेकिन बर्तनों की खरीदी सिर्फ कागजों में हुई। उन पैसों को गोलमोल हो गया। बर्तन खरीदी के पीछे मकसद यह था कि महिला समूहों द्वारा किफायती दामों में आम लोगों को बर्तन किराए में दिया जाता है। इससे तीन फायदे होते। पहला लोगों को कम दामों में किराए का बर्तन मिल जाता। दूसरा प्लास्टिक का उपयोग कम होता और तीसरा महिला समूहों के आय के स्त्रोत में बढ़ोत्तरी होती।

नगर के अधिकांश निर्माण कार्यों में तकनीकी पहलुओं को ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पालिका का लोक निर्माण विभाग आंख मूंदकर मेजरमेंट बुक भर रहा है। कार्यों व गुणवत्ता की मानीटरिंग ही नहीं की जा रही है। ठेकेदार अपनी सुविधा और मर्जी से काम कर रहे हैं। वहीं कई बगैर वर्क आर्डर के हो रहे हैं। ऐसे कई व्यवस्थागत खामियों के कारण व भुगतान में देरी की वजह से ठेकेदार भी अपनी मर्जी चला रहे हैं।

इधर ढाई साल बाद भी पालिका का फायर बिग्रेड बनकर नहीं आ पाया है। धरमपुरा में 35 लाख कंपोस्ट मशीन कंडम हो रहा है। लाल बहादुर क्लब का कार्य आधा-अधूरा पड़ा है। 20 लाख के गौठान में मवेशी जाली तार फांदकर भाग रहे हैं। गोधन न्याय योजना के तहत जितना गोबर खरीदा गया है, उस अनुपात में खाद तैयार नहीं किया जा सका है।

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