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सीजी क्रांति न्यूज/खैरागढ़ । कुछ दिन पहले ही खैरागढ़ पुलिस के समक्ष 17 लाख रुपए की ईनामी नक्सली ने आत्मसमर्पण किया है। इस फेहरिस्त में और नाम जुड़ सकते हैं ? इसकी संभावना टटोली जा रही है। हिड़मा की मौत, उसके पहले बसव राजू के इनकाउंटर के बाद नक्सली संगठनों की चूले हिल गई है। हाल ही में जोन मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ कमेटी के प्रवक्ता अनंत ने प्रेस नोट रिलीज कर हथियार छोड़कर पुनर्वास योजना स्वीकार करने की करने इच्छा जाहिर की है। इस क्षेत्र में तीनों राज्यों की पुलिस सक्रिय है। सुरक्षा बलों की सक्रियता को देखते हुए कुछ बड़ा होने की संभावना है।

बहरहाल जिला केसीजी के वनांचल क्षेत्र व मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सलियों की मौजूदगी पहले भी साबित हो चुकी है। हालांकि जिले में बड़ी नक्सली वारदात नहीं हुई है। दशकों पहले पांडादाह के करीब ईटार में समीर झा की नक्सलियों ने बेहरमी से हत्या कर दी थी। उसके बाद कोई हिंसक घटना सामने नहीं आई है। जिले की पूर्व पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के कार्यकाल में टिफिन बम बरामद किया गया था। वहीं नोटबंदी के दौरान नक्सलियों के ब्लेक मनी को व्हाईट करते एक ग्राम मारुटोला का एक ग्रामीण को पकड़ा गया था।

जिले में छत्तीसगढ़ व मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र को नक्सलियों का आरामगाह माना जाता रहा है! लेकिन जिले में सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित होने और उनकी संख्या बढ़ने के बाद नक्सली उपस्थिति की जानकारी सामने नहीं आई है। करीब 17 साल पहले गातापार जंगल के समीप ग्राम मलैदा के ग्रामवासियों पर प्रत्येक घर से एक युवा को नक्सली मूवमेंट में शामिल करने की धमकी दी थी। जिसके बाद ग्रामीणों ने अपना गांव ही छोड़ दिया था। जिन्हें गातापार जंगल अस्थायी कैंप में शरण दी गई थी। करीब दो साल पहले आईटीबीपी डीआरजी की संयुक्त टीम ने सर्चिंग के दौरान साल्हेवारा क्षेत्र के खम्हारडीह और कौहाबहरा के बीच जंगल से विस्फोटक सामग्री व नक्सली साहित्य बरामद किए थे। नोटबंदी के दौरान नक्सलियों के पैसों को व्हाईट मनी में बदलने के प्रयास में खैरागढ़ के समीप गांव के व्यक्ति को नक्सली सहयोगी के आरोप में पकड़ा गया था।

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