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सीजी क्रांति न्यूज/ खैरागढ़ ।

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में दर्ज आईटी एक्ट के एक मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में गंभीर हलचल पैदा कर दी है। भाजपा की एक महिला नेता की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में आरोप है कि उनके और उनके पति के मोबाइल नंबर पर कथित रूप से संपादित व आपत्तिजनक तस्वीरें भेजी गईं।

सूत्रों के अनुसार प्राथमिकी में दो मोबाइल नंबरों का उल्लेख है। घटना 13-14 जनवरी की शाम लगभग 7 बजे की बताई गई है। जानकारी के मुताबिक एफआईआर में किसी जनप्रतिनिधि का नाम दर्ज नहीं है! वहीं सोशल मीडिया पर पूर्व विधायक कोमल जंघेल का नाम उछाला जा रहा है। पुलिस ने अब तक किसी की भूमिका की पुष्टि नहीं की है!

खैरागढ़-छुईखदान में दर्ज आईटी एक्ट का मामला अब केवल एक साइबर अपराध की जांच नहीं रह गया है, बल्कि इसने क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी है।

कोमल जंघेल क्षेत्र में सक्रिय नेता रहे हैं और चुनावी राजनीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। ऐसे समय में किसी भी विवाद का राजनीतिक प्रभाव स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाता है। फिलहाल सच डिजिटल साक्ष्यों में छिपा है, जिसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही संभव है।

जांच की दिशा

जानकारी के अनुसार आईजी बालाजी राव के निर्देशन में महिला डीएसपी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। सूत्रों का कहना है कि जांच में इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:

  • संबंधित मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)
  • आईपी एड्रेस और डिजिटल लोकेशन
  • फोटो के स्रोत और एडिटिंग पैटर्न
  • सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग

डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय कर सकती है। हालांकि जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

संभावित प्रभाव

  • यदि जांच में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो इसका असर स्थानीय राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है।
  • यदि आरोप निराधार साबित होते हैं, तो यह राजनीतिक सहानुभूति का कारण भी बन सकता है।
  • डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग का मुद्दा चुनावी विमर्श में नया आयाम जोड़ सकता है।

आईजी बालाजी राव के निर्देशन में गठित जांच समिति की रिपोर्ट इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी। फिलहाल यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि डिजिटल युग में आरोप, राजनीति और सार्वजनिक छवि कितनी तेजी से एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं।

पुलिस का बयान

आईजी बालाजी राव ने बताया कि मामला महिला से जु़ड़ा संवेदनशील विषय है। इसकी जानकारी नहीं दे सकता। महिला नेत्री की शिकायत पर जांच कर एफआईआर दर्ज की गई है। आगे की जांच के लिए महिला डीएसपी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।

छुईखदान थाना प्रभारी शक्ति सिंह ने बताया कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। इसलिए वे कुछ भी नहीं बता पाएंगे।

क्या कहते हैं विधायक कोमल जंघेल

इस मामले में मेरा नाम घसीटे जाने से मैं हैरान हूं। इससे मेरी सामाजिक व राजनीतिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा है। ऐसे संवेदनशील मामलों मे बगैर ठोस प्रमाण के खबरों का प्रकाशन दुर्भाग्यजनक है। खैर जनता से मेरा सीधा संपर्क और संवाद है। इसलिए मैं निंश्चित हूं कि जनता सब जानती है और समझती है। सालों की तपस्या के बाद मैंने जनता के बीच अपनी पहचान बनाई है। मैं दावे के साथ कह रहा हूं कि मेरे जीवन में मैंने न किसी का गलत किया न ही किसी से गलत व्यवहार किया है।

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