मानसून सत्र में भाजपा लाएगी अविश्वास प्रस्ताव, नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के निवास में विधायक दल की बैठक, सरकार को घेरने बनी रणनीति


सीजी क्रांति न्यूज/रायपुर। सोमवार को भाजपा विधायक दल की बैठक नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के निवास में हुई। बैठक के प्रारंभ में वैशाली नगर विधायक दिवंगत विद्यारतन भसीन को भाजपा विधायक दल ने श्रद्धांजलि दी। बैठक में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा 18 से 21 जुलाई तक होने वाला मानसून सत्र बेहद छोटा सत्र है। हमने पहले भी मांग की थी कि संभवत यह अंतिम सत्र हो तो कम से कम 10 बैठकर होनी चाहिए।

इस मानसून सत्र में भारतीय जनता पार्टी भूपेश बघेल के नेतृत्व में चलने वाली कांग्रेसी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। इस अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से हम छत्तीसगढ़ की मूलभूत समस्याओं ज्वलंत समस्याओं व छत्तीसगढ़ में व्याप्त भ्रष्टाचार जैसे कोयला का भ्रष्टाचार, शराब का भ्रष्टाचार, पीएससी घोटाला, राशन घोटाला यह सब जनता के सामने लाएंगे।

कांग्रेस सरकार का असली चेहरा भ्रष्टाचार से भरा हुआ है। छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार भ्रष्टाचार शिरोमणि की उपाधि से विभूषित करने लायक सरकार है। उन्होंने कहा कि भूपेश सरकार से छत्तीसगढ़ की जनता हताश और निराश हो चुकी है छत्तीसगढ़ में बदलाव की बयार चल रही है। हम विधानसभा में छत्तीसगढ़ की जनता जो चाहती है उसे उनकी आवाज बन कर प्रस्तुत करेंगे।

विधायक दल की बैठक में भाजपा अध्यक्ष अरुण साव, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जमवाल, महामंत्री संगठन पवन साय, नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, वरिष्ठ विधायक बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर ,शिवरतन शर्मा, पुन्नूलाल मोहिले, डमरू धर पुजारी, रंजना साहू, कृष्णमूर्ति बांधी व विधायकगण उपस्थित थे।

बता दें कि जुलाई 2022 में इससे पहले जब तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष रहे धरमलाल कौशिश ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था, उसके बाद अब नारायण चंदेल के कार्यकाल में अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी है। छत्तीसगढ़ की पांचवी विधानसभा का मानसून सत्र अगले माह 18 जुलाई से शुरू हो रहा है। संख्या बल के आधार पर अविश्वास प्रस्ताव में कोई दम नहीं है।

अब तक प्रदेश की राजनीतिक इतिहास का आठ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है। अब नौंवी बार प्रदेश की विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव आ रहा है। इससे पहले रमन सिंह के दो कार्यकाल में पांच बार और अजीत जोगी के कार्यकाल में दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था।

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