भाजपा का मिशन 2023 मोड: नड्डा-संतोष के साथ आज रमन, धरम, साय की अहम बैठक, 1998 से अब तक की रिपोर्ट लेकर पहुंचे; संगठन में बदलाव पर भी होगी चर्चा

फाइल फोटो
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सीजी क्रांति/रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से डेढ़ साल पहले नई दिल्ली में गुरुवार को एक अहम बैठक होने जा रही है। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने 1998 के बाद जितने बीबी चुनाव हुए हैं, उसकी रिपोर्ट के साथ बुलाया है। इसमें शामिल होने के लिए पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और संगठन महामंत्री पवन साय दिल्ली पहुंच चुके हैं। बुधवार को विष्णुदेव और पवन साय के साथ बैठक हो चुकी है। गुरुवार को रमन और धरम के साथ बैठक होगी। इसके बाद सभी की एक साथ बैठक ली जाएगी।

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यह बैठक इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आरएसएस के सह सर कार्यवाह अरूण कुमार के भी शामिल होने की चर्चा है। अमूमन चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर आरएसएस-भाजपा की समन्वय बैठक होती है, जिसमें एजेंडे तय होते हैं। आरएसएस अपना फीडबैक देता है। इसे ध्यान में रखकर प्रत्याशी चयन और चुनाव की रणनीति बनाई जाती है। आपको बता दें कि 2018 चुनाव के दौरान ये बातें आई थीं कि छत्तीसगढ़ की तत्कालीन भाजपा सरकार ने आरएसएस के सुझावों को दरकिनार कर दिया था। इसमें बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को बदलने की सिफारिश थी, लेकिन सरकार सहमत नहीं थी। नतीजतन, स्वयंसेवक चुप बैठ गए और 15 साल की सत्ता के बाद भाजपा 15 सीटों पर सिमट गई। समन्वय बैठक में भाजपा फिर से आरएसएस से सहयोग की गुजारिश कर सकती है।

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अब विपक्ष की भूमिका में आक्रामक तेवर दिखाने का समय

2018 के विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद भाजपा चार विधानसभा उपचुनाव हार गई है। इसमें दंतेवाड़ा की खुद की सीट भी शामिल है। हालांकि नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में प्रदर्शन को भाजपा संगठन पूरी तरह नेगेटिव नहीं मानता। संगठन का दावा है कि सारे चुनावों में कार्यकर्ताओं ने बेहतर प्रदर्शन किया। नगरीय निकायों में भाजपा पूरी तरह बाहर नहीं हुई, बल्कि बड़े शहरों में कांग्रेस के आसपास ही थी। खैरागढ़ उपचुनाव में भी जिले के ट्रम्प कार्ड के बावजूद पिछले चुनाव से भाजपा का वोट बढ़ा। हालांकि इस दौरान संगठन की गतिविधियां बेहद कमजोर रही। पार्टी के रणनीतिकारों का अब मानना है कि लोगों और संगठनों की लड़ाई को आवाज देने का यह सही समय आ गया है।

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खैरागढ़ चुनाव से क्यों दूर रहीं भाजपा के छत्तीसगढ़ प्रभारी

भाजपा की छत्तीसगढ़ प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी और सह प्रभारी नितिन नवीन खैरागढ़ उपचुनाव में प्रचार के लिए नहीं पहुंचे। हालांकि पुरंदेश्वरी के बस्तर और नितिन का सरगुजा दौरा कांग्रेस-भाजपा के राजधानी के नेताओं के लिए कौतूहल और खतरे की घंटी की तरह है। पुरंदेश्वरी आंध्रप्रदेश की हैं और छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्से में तेलुगु लोगों का प्रभाव है। इसी तरह नितिन बिहार से हैं और सरगुजा संभाग में बिहार, झारखंड और यूपी का प्रभाव है। दोनों एक-एक संभाग पर फोकस कर रहे हैं। खैरागढ़ में हार के बावजूद पार्टी नेतृत्व प्रदर्शन से संतुष्ट है, क्योंकि पूरी सरकार की ताकत झोंकनी पड़ गई थी। पुरंदेश्वरी हर दिन का अपडेट ले रही थीं और चुनाव परिणाम के बाद हुई बैठक में यह कहकर कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया कि सरकार की बेचैनी ही भाजपा की जीत थी।

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भाजपा में क्या नेतृत्व परिवर्तन होगा या नए चेहरे सामने लाएंगे

छत्तीसगढ़ में एक चर्चा बेहद तेजी से फैल रही है कि प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय को हटाया जा सकता है। इसके अलावा कुछ जिलाध्यक्ष और मोर्चा-प्रकोष्ठ के नेताओं को भी बदला जा सकता है। इसी चर्चा में एक पक्ष यह भी है कि विष्णुदेव साय अपनी जगह पर बने रहेंगे, लेकिन कुछ नए चेहरों को आगे लाया जाएगा, जो अलग-अलग वर्गों को प्रभावित करेंगे। बेजान होती जा रही पार्टी के कार्यकर्ताओं को चार्ज किया जाएगा। नई दिल्ली की बैठक में इन्हीं मुद्दों को लेकर कुहासा साफ होगा। यह तय माना जा रहा है कि आरएसएस-भाजपा की समन्वय बैठक के बाद भाजपा चुनावी मोड पर आ जाएगी।

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