पूर्वजों की जमीन और गांव उजड़ने का डर था साहब, फरियाद ही करने तो गए थे पर ब्यूरोक्रेसी बुरा मान गई, और किसानों पर कर दिया FIR

सीजी क्रांति न्यूज/ खैरागढ़। छुईखदान ब्लाक में श्रीसीमेंट का प्लांट लगने की खबर सुनकर विचारपुर, पंडरिया, संडी, बुंदेली के ग्रामीणों की नींद उड़ गई। गांवों में जमीन खरीदने दलालों की चहलकदमी के बाद हैरानी के साथ, ग्रामीणों में नाराजगी नाराजगी भी बढ़ने लगी। तकलीफ इस बात को लेकर भी है कि ग्रामीणों के बगैर जानकारी या विश्वास लिए बगैर सीधे उनके गांवों में सीमेंट प्लांट की तैयारी शुरू हो गई! बस इसी बात पर प्रशासन का रूख जानने और वास्तविक स्थिति का पता लगाने ग्रामीण कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा से मुलाकात करने पहुंच गए। पर उन्हें इसका बड़ा खमियाजा भुगतना पड़ा। उन पर एफआईआर हो गया। इससे पहले घंटों भरी दोपहरी में ग्रामीणों को सड़कों पर पेड़ों की छांव में बैठे कलेक्टर का इंतजार करना पड़ा।

जमीन खोने का डर और भूखे-प्यासे इंतजार की जब हद हो गई तब ग्रामीणों का सब्र टूटने लगा। इसके बाद वे कलेक्टोरेट परिसर के सामने धरने पर बैठ गए। संयोग से उसी दिन जिले के प्रभारी सचिव की मीटिंग चल रही थी। जब वे बाहर निकले तो नाराज ग्रामीणों ने अफसरों से बात करनी चाही लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे भड़क गए और नारेबाजी शुरू हो गई।

अंततः कलेक्टर श्री वर्मा ने ग्रामीणों को बुलाया, लेकिन ग्रामीण अपनी बात कह पाते, उससे पहले कलेक्टर ने ग्रामीणों को ही फटकार लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए। आखिरकार ग्रामीण अपनी समस्या बता पाते या सीमेंट प्लांट के बारे में प्रशासन से कुछ जान पाते, उन्हें उन्टे पांव वापस आना पड़ा। ब्यूरोक्रेसी के सामने जनता बौनी साबित हो गई। लिहाजा इस घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासनिक रवैए के प्रति नाराजगी और गहरी हो गई है।

ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि उनके पूर्वजों की जमीन सीमेंट प्लांट को देने की तैयारी हो रही है। उन्हें खबर ही नहीं है। ग्रामीणों से न संवाद हुई न उन्हें विश्वास में लिया गया। सीधे मीडिया के माध्यम से सीमेंट कंपनी के लिए जमीन अधिग्रहण करने जमीन का चिन्हांकन की खबर से वे घबरा गए। इस पूरे मामले में क्षेत्र के बडे जनप्रतिनिधि भी खामोश है। ग्रामीण इसका प्रतिशोध आगामी लोकसभा चुनाव में लेने का विचार बना रहे हैं।

सीमेंट प्लांट लगने से रोजगार और विकास होने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन ग्रामीणों को यह समझ नहीं आ रहा है। प्लांट लगने से उन्हें मजदूरी तो मिलेगी पर उनका जमीन से मालिकाना हक भी छिन जाएगा। कंपनी में जिस प्रकृति के रोजगार सजृन होंगे, वह योग्यता क्या उनके पास है या फिर वह योग्यता हासिल करने में प्रशासन उनकी क्या मदद कर सकती है। ऐसे ही उठते सवालों का जवाब पूछने जनता प्रशासन के चौखट पर गई थी लेकिन वहां उनकी फरियाद जिम्मेदारी और संवेदनशील होकर किसी ने नहीं सुनी!

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